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GOOD ARTICLES Secularism, embodies basic principles of harmony —the ethic of reciprocity.  the golden rule, it mandates, “Do to others as you would want them to do to you.”  The Constitution ensures this -- it  mandates religious freedom but also constitutional sanction for state interference in religious affairs. The trouble is the unequal application of this sanction. This sanction is used for state administration of temples and maths, even legislation of who should be admitted into the temples. In dealing with minority religions, there are political constraints, But in respect of the majority, there is no political constraint. the state has taken over places of worship and collection of revenue from offerings of the majority religion, but not others. Moreover, such revenue can be redistributed for other purposes, including maintenance of institutions of other religions, even those which are opposed to the majority religion. This unequal treatment of religions by the ...

गोवंश ह्रास की नीति 21-26 of 26

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गोवंश ह्रास की नीति 21-26 of 26

गोवंश ह्रास की नीति 15-20 of 26

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गोवंश ह्रास की नीति  15-20 of 26

गोवंश ह्रास की नीति 8-14 of 26

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गोवंश ह्रास की नीति  8-14 of 26

गोवंश ह्रास की नीति 1-7 of 26

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गोवंश ह्रास की नीति  1-7 of 26

सुप्रशासनाचे पंचशील -- लोकमत 26 जाने.. 2013

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मागोवा अर्थात पूर्ण होणे वर्तुळाचे jpg pg 1-5

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मागोवा अर्थात पूर्ण होणे वर्तुळाचे क़ॉलेजात भोतिकी विषय शिकताना त्यांतील कित्येक सिद्धांत व त्यामागील वैचारिक टप्प्यांनी मला मोहवून टाकले होते.असाच एक सिद्धांत म्हणजे आम्लीफायर सर्किट आणि ऑस्सीलेटर सर्किटचा. इलेक्ट्रॉनिक्सच्या विकासाच्या आरंभिक काळांत ट्रायोड वॉल्व्हच्या ग्रिडवर एखादा विद्युत सिग्नल टाकल्याने बाहेर मिळणारे आउटपुट त्याच सिग्नलबरहुकुम पण मोठे म्हणजे आम्लीफाय झालेले असते हे लक्षांत आले.

आक्रोश आणि स्थितीपरायणतेच्या मधे काय ? -- अपूर्ण

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झाडू आणि झुरळे लोकमत 06-01-2013

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झाडू आणि झुरळे - लीना मेहेंदळे (ज्येष्ठ सनदी अधिकारी) 06-01-2013  सामान्य माणसांचा प्रतिनिधी असलेला,  ‘वेन्सडे’ या सिनेमाचा कथानायक  मुर्दाड व्यवस्था आणि राजकीय नेत्यांना उद्देशून म्हणतो, ‘माझ्या घरात झालेल्या झुरळांनी  मला अगदीच जीव नकोसा केला म्हणून नाईलाजाने मी झाडू घेऊन मैदानात उतरलो आहे.  पण झुरळे मारणे हे काम  मी रोजच्या रोज करू शकत नाही. त्यासाठी मी तुम्हाला नेमले आहे आणि निवडून दिले आहे.’ ---------------------------------------------------------------------------------- मी सांगलीची जिल्हाधिकारी असतानाची गोष्ट. एकदा ऑफिसमध्ये एक तातडीची समस्या तयार झाली. शनिवारी रात्री उशिरापर्यंत आम्ही त्या विषयाशी झगडत होतो. समाधानकारक तोडगा हाताशी येईना तेव्हा मी माझ्या अधिकार्‍यांना म्हटले, उद्या सकाळी घरी या. आपण थोडावेळ बसू. रविवारी सकाळी संबंधित अधिकारी कागदपत्रे घेऊन माझ्या घरी जमले. विचार झाला होता. प्रश्न सोडवण्याचा आता केवळ एकच मार्ग आहे, हे सार्‍यांना जाणवत होते; पण तरीही आम्ही अडकलो होतो. - कारण सर्वानुमते ‘योग्य’ असलेला एकमेव पर्याय ‘सिस्ट...

देश चालवणा-या माणसांची गोष्ट -- दिवाळी अंक नमस्कार

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डूबेंगे शर्ममें बारबार -- (दिल्ली गँगरेप केस)

डूबेंगे शर्ममें बारबार -- (दिल्ली गँगरेप केस) दिल्ली एक बार फिर शर्म में डूबी। परसों घटी गँगरेप के मुद्देपर फिर हाहाकार हुआ -- चूँकि संसद चल रही थी तो कई सांसदों को अपना दुख, क्रोध, हतबलता व्यक्त करने का मौका मिला। लेकिन मैं कहना चाहूँगी कि इतनेभरको कर्तव्यपूर्ती समझकर चुप मत बैठो। आज संसदमें लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार है, काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी है, विपक्ष नेता सुषमा स्वराज है। कल तक राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील थी, इनसे मैं कहूँगी -- आज लम्बेचौडे प्लान बनानेका, नया कानून गढनेका वक्त नही है। जो कानून हैं, उन्हें शीघ्रतासे क्रियान्वित करनेकी जरूरत है। पीडितोंका बयान मॅजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराओ और पकडे गये आरोपियोंका भी -- क्योंकि इसी खामी के कारण कई मुकादमोंमें सजा नही हो पाती है। एक सेशन जज को तत्काल इस काम की ड्यूटी हायकोर्ट सौंप सकता है कि उसके पास हर दिन सुनवाई चलेगी -- जो भी गवाह मिलें उनकी साक्ष ली जायगी। और इसका मॉनिटरिंग भी राष्ट्रीय महिला आयोगको सौंपो जो हर सप्ताह रिपोर्ट बनाकर सभी महिला सांसदोंको और हाईकोर्टको भी दे -- उनके साथ दिल्लीके लॉ कालेजेस की चुनी हुई प्रतिभ...

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****** युगान्तर के पर्व में

युगान्तर के पर्व में - लीना मेहेंदळे हम कहते सुनते हैं कि हिंदु धर्म मे चार वेद कहे गये हैं - ऋग्वेद , यजुर्वेद , सामवेद और अथर्व वेद | चार वर्ण भी कहे गये हैं - ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य और शूद्र | चार आश्रम हैं - ब्रह्मचर्य गार्हस्थ , वानप्रस्थ और संन्यास | इसी प्रकार चार युग भी कहे गये हैं - सत्य युग , त्रेता युग , द्बापर युग और कलि युग | मेरी मान्यता हैं ये सभी संकल्पनाएँ एक दूसरे में गुंथी हुई हैं | देखा जा सकता हैं कि सत्य युग में समाज की परिकल्पना तो उदित हो चुकी थी लेकिन राजा और राज्य की परिकल्पना अभी दूर थी | आग का आविष्कार हो चुका था , उसी प्रकार भाषा का भी | आँकडों क े गणित का भी ज्ञान था और वर्णमाला तथा लेखन कला का भी | मनुष्य अपने आविष्कारों से नए नए आयाम छू रहा था | कृषि और पशुपालन दैनंदिन व्यवहार बन चुके थे और कृषि संस्कृति का विस्तार भी हो रहा था | ज्ञान और विज्ञान की साधना हो रही थी | ...